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जून 2026 में सोयाबीन + अरहर तथा मक्का + मूंग की मिश्रित खेती: किसानों के लिए लाभदायक खेती का मॉडल

परिचय

आज के समय में खेती केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों के लिए जोखिम कम करना और अधिक लाभ कमाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बदलते मौसम, अनियमित वर्षा और बढ़ती लागत के कारण किसान ऐसी खेती की तलाश में हैं जो कम जोखिम के साथ अधिक आय प्रदान कर सके।

इसी दिशा में मिश्रित फसल खेती (Mixed Crop Farming) एक प्रभावी विकल्प बनकर उभरी है। जून 2026 के खरीफ सीजन में सोयाबीन + अरहर तथा मक्का + मूंग की मिश्रित खेती किसानों के लिए अत्यंत लाभदायक साबित हो सकती है। ये फसल संयोजन न केवल उत्पादन बढ़ाते हैं बल्कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और अतिरिक्त आय प्राप्त करने में भी मदद करते हैं।


मिश्रित खेती क्या है?

मिश्रित खेती वह पद्धति है जिसमें एक ही खेत में दो या दो से अधिक फसलें एक साथ उगाई जाती हैं। इसका उद्देश्य भूमि, पानी और पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग करना तथा खेती में जोखिम को कम करना होता है।

मिश्रित खेती के प्रमुख लाभ

  • फसल खराब होने का जोखिम कम होता है।
  • प्रति एकड़ उत्पादन बढ़ता है।
  • मिट्टी की उर्वरता में सुधार होता है।
  • कीट एवं रोगों का प्रभाव कम होता है।
  • किसानों को विभिन्न स्रोतों से आय प्राप्त होती है।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में सहायता मिलती है।

1. सोयाबीन + अरहर की मिश्रित खेती

यह संयोजन क्यों लाभदायक है?

सोयाबीन और अरहर दोनों खरीफ मौसम की प्रमुख फसलें हैं। सोयाबीन जल्दी तैयार हो जाती है जबकि अरहर लंबी अवधि की फसल है। दोनों फसलें एक-दूसरे के साथ अच्छी तरह विकसित होती हैं।

फायदे

1. सोयाबीन से जल्दी आय प्राप्त होती है।

2. अरहर अतिरिक्त आय का स्रोत बनती है।

3. अरहर की गहरी जड़ें मिट्टी को बेहतर बनाती हैं।

4. खेत में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है।

5. कम वर्षा की स्थिति में भी अरहर अच्छा उत्पादन दे सकती है।


बुवाई का समय

  • जून के दूसरे सप्ताह से जुलाई के पहले सप्ताह तक
  • मानसून की पहली अच्छी बारिश के बाद बुवाई करें।

बीज दर

सोयाबीन

  • 25 से 30 किलोग्राम प्रति एकड़

अरहर

  • 2 से 3 किलोग्राम प्रति एकड़

कतार व्यवस्था

  • 4 कतार सोयाबीन + 2 कतार अरहर
  • या
  • 6 कतार सोयाबीन + 1 कतार अरहर

यह व्यवस्था अधिक उत्पादन देने में सहायक होती है।


संभावित लाभ

एक एकड़ क्षेत्र में किसान:

  • सोयाबीन से 8–12 क्विंटल उत्पादन
  • अरहर से 2–4 क्विंटल उत्पादन

प्राप्त कर सकते हैं।


2. मक्का + मूंग की मिश्रित खेती

यह संयोजन क्यों लोकप्रिय हो रहा है?

मक्का और मूंग का संयोजन छोटे और मध्यम किसानों के लिए अत्यंत लाभदायक माना जाता है। मूंग एक दलहनी फसल है जो मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करती है।

प्रमुख लाभ

1. मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है।

2. मक्का का उत्पादन बेहतर होता है।

3. मूंग से अतिरिक्त आय प्राप्त होती है।

4. खरपतवार नियंत्रण में सहायता मिलती है।

5. कम लागत में अधिक लाभ मिलता है।


बुवाई का समय

  • जून के प्रथम सप्ताह से जुलाई के प्रथम सप्ताह तक

बीज दर

मक्का

  • 8–10 किलोग्राम प्रति एकड़

मूंग

  • 5–6 किलोग्राम प्रति एकड़

कतार व्यवस्था

  • 1 कतार मक्का + 2 कतार मूंग
  • या
  • 2 कतार मक्का + 4 कतार मूंग

संभावित उत्पादन

एक एकड़ क्षेत्र में:

  • मक्का: 15–20 क्विंटल
  • मूंग: 2–3 क्विंटल

उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।


मिश्रित खेती में उर्वरक प्रबंधन

जैविक खाद

  • 2–3 टन गोबर की सड़ी हुई खाद प्रति एकड़

रासायनिक उर्वरक

  • मिट्टी परीक्षण के अनुसार उर्वरकों का प्रयोग करें।
  • नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश संतुलित मात्रा में दें।

सिंचाई प्रबंधन

  • वर्षा आधारित क्षेत्रों में जल निकास की उचित व्यवस्था रखें।
  • सूखे की स्थिति में जीवन रक्षक सिंचाई करें।
  • ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई अपनाकर पानी की बचत करें।

कीट एवं रोग प्रबंधन

प्रमुख उपाय

  • प्रमाणित बीज का उपयोग करें।
  • समय पर खरपतवार नियंत्रण करें।
  • फसल चक्र अपनाएं।
  • जैविक कीटनाशकों का प्रयोग करें।
  • नियमित खेत निरीक्षण करें।

मिश्रित खेती से किसानों को होने वाले आर्थिक लाभ

लाभविवरण
जोखिम कमएक फसल खराब होने पर दूसरी फसल से आय
अधिक उत्पादनप्रति इकाई क्षेत्र अधिक उपज
अतिरिक्त आयदो फसलों से कमाई
मिट्टी सुधारदलहनी फसलों से नाइट्रोजन बढ़ती है
लागत में कमीउर्वरक की आवश्यकता कम होती है

किसानों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

  1. स्थानीय जलवायु के अनुसार फसलों का चयन करें।
  2. प्रमाणित एवं उन्नत किस्म के बीजों का उपयोग करें।
  3. मिट्टी परीक्षण करवाकर उर्वरक प्रबंधन करें।
  4. खेत में जल निकास की उचित व्यवस्था रखें।
  5. कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार फसल प्रबंधन अपनाएं।

निष्कर्ष

जून 2026 के खरीफ सीजन में सोयाबीन + अरहर तथा मक्का + मूंग की मिश्रित खेती किसानों के लिए लाभदायक, टिकाऊ और कम जोखिम वाली खेती का उत्कृष्ट मॉडल है। यह प्रणाली उत्पादन बढ़ाने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि किसान सही तकनीक और उचित प्रबंधन अपनाएं तो मिश्रित खेती से बेहतर लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

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