सर्दियों में पौधों की देखभाल कैसे करे :- जैसा की हम सभी जानते है ठंड का मौसम शुरू होने वाला है और ठंड का मौसम शुरू होते ही बगीचे,
बालकनी और छत पर लगे पौधों की जरुरत बदलने लगती है| तापमान में गिरावट ,ठंडी हवा ,मिट्टी में ज्यादा समय तक नमी रहने के कारण कई पौधों की ग्रोथ धीमी हो जाती है | कुछ पौधें की पत्तियाँ पीली पड़ने लगती है |फूल झड़ने लगते है अत्याधिक ठंड या पाला पड़ने पर प्लांट्स (पौधें) को भारी नुकसान भी हो सकता हैं |
अगर आप चाहते है ठंड में भी हमारे पौधे हरे भरे रहे आपका गार्डन फूलों पत्तियों से लदा रहे हो पक्षियों तितलियों की रौनक बनी रहे तो कुछ बातें हमे ध्यान देनी होगी |
इस आर्टिकल में हम जानेंगे सर्दियों में पौधों को कब पानी देना चाहिए ,खाद कैसे डालना चाहिए , गमलें को कहाँ पर रखना चाहिए, पाले से पौधे को कैसे बचाये, घर के अंदर और बाहर रखे पौधों की देखभाल कैसे करे |
1. सर्दियों में पौधों को किन- किन समस्या का सामना करना पड़ता है ?
ठंड के मौसम मे सभी पौधों पर एक जैसा प्रभाव नही पड़ता |कुछ पौधें ठंडे मौसम में अच्छी तरह बढ़ते है , जबकि गर्म मौसम पसंद करने वाले पौधों को विशेष सुरक्षा की जरूरत होती है।
सर्दियों में पौधों को होने वाली प्रमुख समस्याएं –
- पत्तियों का पीला पड़ना : ज्यादा पानी, पोषक तत्वों की कमी या अधिक ठण्ड के कारण |
- पत्तियों का मुरझाना : ठंडी हवा, जड़ो की क्षति,या पानी की कमी |
- फूलों का झड़ना : अचानक तापमान का कम होना तथा प्लांट्स (पौधें) की देखभाल अच्छे से नही होना |
- जड़ो का गलना : ठंड में मिट्टी देर से सूखती है लगातार नमी होने के कारण पौधे को पर्याप्त हवा नहीं मिल पाती
- पाले से नुकसान : पाला पड़ने से नई पत्तियाँ, नयी शाखाएं ,फूलों को भारी नुकसान होता है |
- ग्रोथ धीमी होना : कई पौधे कम तापमान में धीरे -धीरे बढ़ते है |

महत्वपूर्ण बात:-हर पीली पत्ती का कारण ठंड नही होता है पौधें की जड़ों,रोशनी तथा पत्तियों की स्थिति देख कर ही समस्या का कारण पहचाने |
2. सर्दियों मे पौधों को पानी कब और कितना देना चाहिए ?
सर्दियों में पौधों की देखभाल करने का प्रमुख हिस्सा सही मात्रा में पानी देना है |गर्मियों के दिन की तरह रोज पानी देना जरूरी नहीं होता है इसका मतलब ये नही है की हम ठंड में पौधों को पानी देना बंद कर दे |
पानी देने का सही तरीका
- गमले की मिट्टी को लगभग उँगली से लगभग 2-3 सेंटीमीटर तक जांचे |
- यदि मिट्टी में नमी है तो पानी ना दें थोडा इंतजार करे |
- यदि मिट्टी सूखी महसूस हो और पौधें की प्रजाति को पानी की जरूरत हो तो धीरे-धीरे पानी दे |
- इतना पानी दें कि मिट्टी में नमी जड़ों तक पहुँच जाये |
- गमले के बर्तन में जमा अतिरिक्त पानी निकल दें |
छोटे गमले में मिट्टी जल्दी सूख जाती है लेकिन बड़े गमलों में मिट्टी देरी से सूखती है इसलिए पानी देने का अंतराल गमले के आकार , पौधें की प्रजाति,धुप और मौसम पर निर्भर करेगा |
पानी देने का सबसे अच्छा समय
सुबह के समय पानी देना अच्छा रहता है | इससे दिन में पौधें को पानी सोखने का समय मिल जाता है और मिट्टी में रात भर नमी बने रहने की संभावना का हो जाती है |
बहुत ठन्डे या पाले वाले दिनों में पानी देने से पहले मौसम तथा मिट्टी की स्थिति जरुर जाँच ले |
नोट – कैक्टस, सक्युलेंट, मनी प्लांट, गुलाब और सब्जियों में पानी की जरूरत एक़ जैसी नहीं होती | हर पौधें को एक ही नियम से पानी न दें |
3. पौधों को ठंड और पाले से कैसे बचाये
पाला सर्दियों में पौधों को नुकसान पहुँचाने वाले कारणों में से एक है | छोटे पौधे, नये पौधें, कोमल पत्तियों वाले पौधें और गरम इलाके वाले पौधें को अधिक नुकसान हो सकता है |
गमलों को सुरक्षित जगह पर रखे
यदि आपकी बालकनी या छत पर गमले रखे हैं, तो ठंडी हवा सीधे लगने वाली जगह से उन्हें हटाकर सुरक्षित स्थान पर रखें।
- संवेदनशील पौधें को ढकी हुई बालकनी या बरामदे में रखे |
- ठंडी हवा के सीधे संपर्क को कम करे |
- गमलों को ऐसी जगह रखें जहाँ पर्याप्त रोशनी आती हो |
- ठंड के प्रति संवेदनशील पोधें को जरूरत पड़ने पर घर के अंदर ले जाएँ |
सभी पौधें को बंद कमरे में रखना उचित नही है कुछ पौधें को पर्याप्त रोशनी और हवा की जरूरत होती हैं |
पौधों को ढकने का सही तरीका
यदि मौसम विज्ञान ने पाले की चेतावनी दी है, तो पौधे को साँस लेने योग्य कपडें या पौधा सुरक्षा कवर से ढँक सकते हैं |
- कवर को संभव हो तो पौधे की पत्तियों से ऊपर रखे |
- कवर को नीचे मिट्टी के पास सुरक्षित करे ताकि हवा का प्रभाव कम हो
- दिन में तापमान बढ़ने पर कवर हटा दे या खोल दें
- प्लास्टिक की शीट सीधे पत्तियों पे न लपेटें
- लम्बे समय तक पौधें को बंद और गीले कवर के नीचे न रखें |
गंभीर पाले में केवल ढकना पर्याप्त नहीं हो सकता। सुरक्षा का स्तर पौधे की प्रजाति और वास्तविक तापमान पर निर्भर करता है।
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने जनवरी 2026 की ठंड संबंधी सलाह में हल्की सिंचाई, मल्चिंग और सुरक्षा अवरोधों को पाले से प्रभावित हो सकने वाली कोमल फसलों की सुरक्षा के उपयोगी उपायों में शामिल किया था। अपने क्षेत्र के मौसम के अनुसार उपाय चुनें।
4. सर्दियों मे पौधें को कितनी धूप दें ?
सर्दियों में धूप कम होने से कई पौधों की वृध्दि रूक जाती है पर्याप्त रोशनी ना मिलने से पौधें कमजोर हो जाते है तथा फूल भी कम आते है |
पौधों को उनकी जरुरत के अनुसार धूप दें :-
- गुलाब और अधिकांश मौसमी फूल : सामान्य रूप से अच्छी धूप में बेहतर बढ़ते हैं |
- पालक,मैथी, धनिया : पर्याप्त रोशनी वाले स्थान पर अच्छी ग्रोथ करते है |
- मनी प्लांट : तेज धूप की तुलना में उजली रोशनी अधिक अनुकूल होती है |
- कैक्टस और सक्युलेंट: पर्याप्त रोशनी पसंद करते है, अचानक धूप में रखने से पहले धीरे -धीरे अनुकूल बनायें |
- फर्न जैसे छायावाले पौधें : सीधी कडकडाती धूप से बचाएं |
गमलों का स्थान कैसे बदलें :
यदि पौधें ऐसी जगह रखें है ,जहाँ धूप नही पहुँच पा रही है तो उन्हें ऐसे स्थान में रखे ताकि पौधें को पर्याप्त धूप और रोशनी मिल सके |
सभी पोधें को एक साथ धूप में रखना सही नही है ,पोधों की प्रजाति के अनुसार जगह बदलें |
5. सर्दियों में पोधों को खाद कब और कैसे दें ?
- अच्छी तरह सडी हुई गोबर की खाद : इसका उपयोग मिट्टी में आर्गेनिक पदार्थ बढ़ाने के लिए किया जाता है | कच्ची खाद को सीधे प्लांट्स के पास न डालें |
- वर्मीकम्पोस्ट : सक्रिय रूप से ग्रो कर रहे पौधें के लिए ,निश्चित मात्रा में उपयोग कर सकते है
खाद डालते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए
- पहले पता करें पौधें में पोषक तत्व की कमी है या नही |
- पौधें की जड़ों के पास अधिक मात्रा में खाद न डालें |
- सूखी मिट्टी में तेज प्रभाव वाली खाद डालने से बचना चाहिए
- बहुत ज्यादा कमजोर पौधें को अनावश्यक खाद न दें |
- खाद देने के बाद निर्देश के अनुसार पानी दें |
6. ठंड में गमलों की मिट्टी की केयर कैसे करे :
मिट्टी का सही मिश्रण पौधों की जड़ों को स्वस्थ रखने में मदद करता है गमलों में जल निकास अच्छे से होना चाहिए |
गमलें की मिट्टी कैसी होनी चाहिए ?
- साफ और भुरभुरी
- अच्छी तरह तैयार कम्पोस्ट
- मोटी रेत या वायु संचार बढ़ाने वाली सामग्री
पौधें की प्रजाति के अनुसार सामग्री बदल सकती है |
जल निकास क्यों जरुरी है?
गमलो मे छेद होना चाहिए ताकि जल निकास हो , यदि पानी गमलों में भरा रहता है तो पौधें को ऑक्सीजन नही मिल पायेगी और जड़ें सड़ने लगेंगी फिर धीरे – धीरे पौधा नष्ट होने लगेगा |
ठंड के मौसम मे मल्चिंग कैसे करे ?
मल्चिंग का तात्पर्य है मिट्टी की सतह में साफ भूसे, सूखी पत्तियों या जैविक पदार्थों की सामग्री बिछाना | इसको करने से मिट्टी में नमी बनी रहती है और तापमान मे अचानक बदलाव को कम करने में मदद मिलती है |
मल्चिंग करने का तरीका
- मिट्टी की सतह से खरपतवार और सडी सामग्री हटा दें |
- मिट्टी में नमी चेक करे
- मिट्टी के ऊपर सूखी पत्तियों या आर्गेनिक सामग्री की परत बिछाए |
- पौधें के तने के पास मोटी परत न जमायें |
- समय -समय पर चेक करते रहे मल्च के नीचे ज्यादा गीली मिट्टी तो नही है |
छोटे गमले में मोटी मल्चिंग न करे | मल्चिंग से पूरी तरह से पाले से बचाओ की गारंटी नही होती |कुछ हद तक तापमान मेन्टेन करना है |
शीत ऋतु में फूल वाले पौधें की देख – रेख कैसे करे ?
ठंड के दिनों में कई फूल अच्छी तरह खिलते है | सही देखभाल करके हम गार्डन की सुन्दरता बढ़ा सकते है |
गुलाब की देखभाल
- पौधों को पर्याप्त धूप दें |
- मिट्टी में नमी देख कर पानी दें
- सूखी और रोगग्रस्त शाखाएं साफ़ ओजार से हटा दें
- पौधें की जरूरत के अनुसार पोषण दे
- पालें की चेतावनी होने पर संवेदनशील पौधें का विशेष ध्यान रखें |
गुलाब में भारी कटाई -छटाई उसकी किस्म और स्थानीय जलवायु के अनुसार तय करे |
गेंदा और गुलदाउदी
- मुरझाये फूलों को हटा दें
- मिट्टी में पानी जमा न होने दें
- फूल और पत्तियों पर रोग के लक्षण देंखे
- पौधों के बीच हवा आने -जाने के लिए जगह रखें
पेटूनिया और मौसमी फूल
- पर्याप्त रोशनी दें
- जरूरत अनुसार पानी दें
- सूखे फूल और पत्तियां हटाते रहे
- अधिक खाद देने से बचे
हर एक फूल की मौसम और तापमान सहन करने की क्षमता अलग अलग होती है पौधें की किस्म के अनुसार देख रेख करें
सर्दियों में सब्जियों के पौधों की देखभाल
घर के किचन गार्डन में ठंड के समय पालक, मैथी, धनिया, गाजर, मूली और मटर जैसे फसलें उगाई जाती है
पालक और मैथी
- मिट्टी में नमी बनायें
- पानी न भरने दें
- पौधों को धूप दें
- अधिक घनी बुवाई न करे
धनिया
- जल निकास वाली मिट्टी चुने
- मिट्टी सूखने लगे तब पानी दें
- पौधों को पर्याप्त रोशनी में रखें
- बहुत ज्यादा पानी न दें
मटर
- पौधों को सहारा दें यदि किस्म को जरूरत है तो
- फूल और फल बनते समय मिट्टी में पानी की कमी न होने दे
गाजर और मूली
- मिट्टी को भुरभुरा बनायें रखे
- जलभराव न होने दें
- उचित दुरी पर पौधों को लगायें
किसी भी सब्जी की बुवाई से पहले अपने क्षेत्र का तापमान , बीज की किस्म एवं बुवाई का समय देख लें |
ठंड के मौसम में घर के अंदर लगें पौधें की देख रेख
मनीप्लांट ,स्नेकप्लान्ट , और अन्य प्लांट्स को ठण्ड एवं बदलते तापमान से बचाना बहुत ज्यादा जरुरी है |
- पौधें को खिड़की या दरवाजे से आने वाली ठंडी हवा से दूर रखें
- नेचुरल रौशनी आने दें
- पानी देने से पहले मिट्टी में नमी चेक करे
- पत्तियों में लगी धूल-डस्ट साफ़ करे
- पत्तियों की नीचे वाली सतह चेक करते रहे कीट तो नही लग रहे
पौधों की कटाई – छटाई कब करे
सर्दियों में सभी पौधें की कटाई -छटाई करना उचित नही है
काटते-छाटते टाइम किन बातों का ध्यान रखे
- सूखी या रोग से ग्रस्त डालियों को साफ़ ओजार से हटायें
- पौधें की स्वस्थ शाखाओं को न काटें
- रोगग्रस्त शाखाओ को काटने के बाद ओजार साफ़ करें
- फूल देने वाले पौधों की छंटाई उनके फूल आने के समय के अनुसार करें।
गुलाब, फलदार पोधें, झाड़ियों एवं मौसमी फूलों की कटाई का समय अलग अलग होता है
ठण्ड में लगने वाले रोग एवम कीट
ठण्ड मे पौधें पर माहू,मिलीबग और अन्य इन्सेक्ट लगते है
कीटों की पहचान कैसे करे
- पत्तियों की निचली परत पर छोटे छोटे कीड़े दिखाई देते है
- नई पत्तियों का मुड़ना या चिपचिपा होना
- पत्तियों मे सफ़ेद रुई जैसी परत का बनना
- पत्तियों में भूरे और पीले रंग के धब्बे दिखाई देना
- पौधों के आस -पास चीटियों का झुण्ड दिखाई देना
बचाव
- प्रभावित पौधें को दूसरे पौधें से अलग रखें
- संक्रमित पत्तियों को सावधानीपूर्वक हटा दें
- किसी भी कीटनाशक देने से पहले कुछ हिस्से पर परीक्षण कर लें
पौधों की देखभाल के लिए जरुरी उपकरण
- हैण्ड ट्रावेल : मिट्टी भरने और छोटे पौधें लगाने के लिए |
- प्रूनिंग केंची : सूखी और अनावश्यक टहनियों को काटने के किये |
- वाटरिंग केन : निश्चित मात्रा में पानी देने के लिए |
- स्प्रे बोतल : पत्तियों की सफाई के लिए
- बागवानी दस्ताने : मिट्टी और कांटेंदार पौधे में काम करने के लिए
- मल्चिंग सामग्री : मिट्टी की सतह ढकने के लिए
- पौधा सुरक्षा कवर : ठंडी हवा और हल्के पाले से बचाने के लिए
मध्यप्रदेश में ठंड के मौसम में पौधों की सुरक्षा
मध्य प्रदेश में सर्दियों का प्रभाव स्थान, ऊँचाई, स्थानीय तापमान और मौसम की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में भी हर सर्दी एक जैसी नहीं होती।
अक्टूबर के खत्म होते ही पौधें पर ध्यान देना शुरू कर दें
यदि आप किसान हैं, तो खेत की फसलों के लिए कृषि विभाग या कृषि विश्वविद्यालय की स्थानीय सलाह को प्राथमिकता दें। बगीचे के गमलों के लिए अपनाए जाने वाले उपाय खेत की हर फसल पर सीधे लागू नहीं होते।
पौधें की देख रेख में होने वाली गलतियाँ
- रोज पानी देना : पौधें में नमी को चेक किए बिना पानी देना,इससे जड़ें सड़ सकती है।
- हर पौधें को अंदर रखना : इससे पौधें को पर्याप्त रोशनी नही मिलती
- सभी पौधों को एक जैसी खाद देना : पोषण की जरूरत पौधें प्रजाति और वृद्धि पर निर्भर करती है।
- गमलों में जल निकास का नही होना : पानी भरा रहने से जड़ें सड़ने लगती है
- सभी पौधें की एक साथ कटाई -छटाई : गलत समय में कटाई छटाई से फूल और नई ग्रोथ प्रभावित हो सकती है |
पौधें की देखभाल के लिए सप्ताह की सूची
हर सप्ताह टाइम निकाल के बागों की जाँच करे
- मिट्टी में नमी देखें
- गमलों के नीचें जमा पानी निकाले
- पौधों में पर्याप्त रोशनी जा रही या नही देखें
- पत्तियों पर कीट और रोग के लक्षण जांचे
- सूखे फूल और रोग से ग्रस्त पत्तियाँ हटा दें
- मौसम विज्ञान की पाले से सम्बंधित जानकारी देखे
- पौधों की वृद्धि के अनुसार खाद देने की जरूरत जाँचें।
FAQ
- सर्दियों में पौधों को कितने दिन में पानी देना चाहिए?
इसका कोई निश्चित अंतराल नहीं है। गमले की मिट्टी की नमी, पौधे की प्रजाति, धूप और तापमान के अनुसार पानी दें। मिट्टी में नमी होने पर पानी न डालें।
निष्कर्ष
पौधों को सुरक्षित रखने के लिए बहुत ज्यादा परिश्रम की जरूरत नही पड़ती | सही मात्रा में पानी दें ,पर्याप्त रोशनी, जलनिकास की सुविधा होना, सही पोषण और पाले के समय विशेष सुरक्षा जरुरी है |
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